हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, तहरीक-ए-इस्लामी नाइजीरिया के नेता शेख इब्राहीम ज़कज़ाकी ने मुसलमानों के बीच एकता और पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (स.) की शिक्षाओं की ओर लौटने पर जोर देते हुए कहा कि दुश्मन मुसलमानों के बीच मतभेद और एकता की कमी से अपने हित साधते हैं।
शेख इब्राहीम ज़कज़ाकी ने यह बात तहरीक-ए-इस्लामी नाइजीरिया के “रिसोर्स फोरम” की ओर से आयोजित जश्न-ए-मिलाद-ए-रसूल-ए-अकरम (स.) को संबोधित करते हुए कही। यह कार्यक्रम रविवार, 14 सितंबर 2026, जो 1 रबीउस्सानी 1448 हिजरी के अनुसार था, आयोजित किया गया।
उन्होंने कहा कि रसूल-ए-अकरम (स.) लोगों के लिए एक संपूर्ण धर्म लेकर आए और इसी धर्म के आधार पर एक समाज की स्थापना की। हमारी जिम्मेदारी है कि हम उनकी शिक्षाओं पर अमल करें।
तहरीक-ए-इस्लामी नाइजीरिया के नेता ने कहा कि दुश्मन पैगंबर-ए-इस्लाम (स.) के व्यक्तित्व को कमजोर करने की कोशिश करते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि मुसलमान रसूल-ए-अकरम (स.) को अपनी एकता और एकजुटता की निशानी मानते हैं।
उन्होंने मुसलमानों के बीच धर्म या राष्ट्रीयता के नाम पर पैदा होने वाले मतभेदों और झगड़ों से सावधान करते हुए कहा कि ऐसे मतभेदों से उम्मत-ए-मुस्लिमा को कोई लाभ नहीं पहुंचता, बल्कि इसका फायदा केवल उन दुश्मनों को होता है जो अपने हितों के लिए मुसलमानों के बीच फूट पैदा करते हैं।
शेख ज़कज़ाकी ने आगे कहा कि दुश्मन लड़ाई और अशांति पैदा करके लोगों का ध्यान असली समस्याओं से हटाने की कोशिश करते हैं, जबकि इसी दौरान मुसलमानों के संसाधनों को लूटा जाता है और लोग अधिक गरीबी और विभाजन का शिकार होते जाते हैं।
उन्होंने कहा कि दुश्मन की इन साजिशों को समझना, मुसलमानों के बीच एकता को मजबूत करना और रसूल-ए-अकरम (स.) की वास्तविक शिक्षाओं की ओर लौटना, उम्मत-ए-मुस्लिमा की समस्याओं के समाधान के महत्वपूर्ण साधन हैं।
उल्लेखनीय है कि तहरीक-ए-इस्लामी नाइजीरिया का “रिसोर्स फोरम” हर साल इस कार्यक्रम का आयोजन करता है, जिसमें इमाम-ए-जमाअत, उलमा, कार्यकर्ता और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग भाग लेते हैं।







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